अखिलेश से नाराजगी की वजह से उर्दू को बनाया जा रहा निशाना
राकेश शर्मा/चन्दन अग्रहरिखेतासराय, जौनपुर। प्रतिष्ठित धर्मगुरु मौलाना फ़ैसल ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव से नाराज़गी के चलते उर्दू भाषा को धर्म से जोड़कर कर निशाना साधा रहे हैं। ऐसा करना बिल्कुल उचित नहीं है। उर्दू भारत मे बोले जानी भाषा है, यह किसी की जागीर नही है। उर्दू, हिन्दी और संस्कृति अल्फाज़ो का एक संगम है। भाषाओं पर सियासत ठीक नहीं है।
वह शुक्रवार को नज़ीराबाद स्तिथ महादुल कुरान में पत्रकारो से बातचीत कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि मदरसो में दी जाने वाली तालीम पर देश की जाँच एजेंसिया जाँच कर चुकी है। यहाँ सिर्फ़ इंसानियत का पाठ पढ़ाया जाता है। मदरसा बोर्ड पर सरकार की नीयत पहले से ठीक नहीं है। अब वक्फ़ बोर्ड को भी अपने अधीन कर लिया गया है। इतिहास गवाह है मुल्क़ को आज़ाद करने में सबसे ज़्यादा फाँसी के फन्दों पर उलेमाओं ने ही शहादत दी है।
मौलाना फ़ैसल ने सदन में मुख्यमंत्री के अभिभाषण पर सवाल उठाते हुए कहा कि महाराज योगी आदित्यनाथ के खुद ही कई अल्फ़ाज़ उर्दू के थे। एक तरफ़ प्रधानमंत्री मोदी अंतराष्ट्रीय स्तर पर मुहब्बत का पैगाम देने के लिए मुस्लिम राष्ट अध्यक्षों को गले लगा रहे है जबकि अपने देश में नफ़रत की राजनीति को हवा दी जा रही है।
भाजपा से मुसलमानों के बैर के प्रश्न पर धर्मगुरु ने कहा कि मुसलमानों का झुकाव सभी सियासी पार्टियों पर है। महाकुंभ में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुँचने पर कहा कि प्रयागराज में मुसलमानों ने दुनिया के सामने दरियादिली दिखा चुके है। इस मौके पर मौलाना राफे, अब्दुल मलिक, हाफ़िज़ अब्दुल्लाह, इकरमा, क़ासिम, महमूद समेत तमाम लोग मौजूद रहे।
- आधा दर्जन छात्रों की दी गयी हिफ्ज़ की डिग्री
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